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यदि पैरो मे गति हो तो क्या कर लेंगी राहे

हिन्दी वेबसाइट में पंकज अवधिया के लेख
पंकज अवधिया

प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक पंकज अवधिया का चिट्ठा
दर्द हिन्दुस्तानी

जब मैने छत्तीसगढ मे जडी-बूटियो से सम्बन्धित पारम्परिक चिकित्सकीय ज्ञान का दस्तावेजीकरण आरम्भ किया तो मेरे पास कम्प्यूटर नही था। मै शोध आलेखो को लिखता फिर पास की दुकान से टाइप करवा लेता। फिर फ्लापी मे इसे लेकर साइबर कैफ़े मे चला जाता जहाँ से इसे बाटेनिकल डाट काम को भेज देता था। पहले सप्ताह मे एक आलेख लिखता रहा तो यह प्रक्रिया सरल लगी पर जब रोज एक आलेख लिखने की शुरुआत हुयी तो आलेखो की कतार लगने लगी। यह सिलसिला एक वर्ष तक चला। फिर जब मैने एकत्र किये गये ज्ञान के दस्तावेजीकरण मे लगने वाले समय का आँकलन किया तो मुझे आभास हुआ कि इस गति से तो यह कार्य दो जन्मो मे पूरा होगा तो मैने गति बढाने का फैसला किया।

यह बडा ही कठिन फैसला था। रोज औसतन दस से बारह घंटे बिना रुके लिखने का। और वो भी कई सालो तक। धीरे-धीरे आदत हो गयी। परिणाम यह रहा कि मैने बारह हजार से अधिक शोध आलेख लिख लिये और उन्हे बाटेनिकल डाट काम मे डाल दिया। इस साइट पर मेरे आलेख को शामिल करने दस कर्मचारी उन्होने रखे और वे दो वर्षो तक लगातार रात-दिन यहाँ तक कि क्रिसमस मे भी काम करते रहे। इतने सारे आलेखो के लिये अलग से साफ्टवेयर भी बनाया गया। इतने सारे आलेखो के बाद जब मैने इसी गति से तीन और वर्ष तक काम करने का इरादा जताया तो उन्होने हाथ खडे कर दिये। फिर इकोपोर्ट मे काम शुरु हुआ।

बहुत पैसे लग रहे थे और कम्प्यूटर वाले ने भी साफ कह दिया कि पैसे ज्यादा देने होंगे क्योकि मेरे कारण और किसी का काम नही हो पा रहा था। अंतत: मैने कम्प्यूटर लिया। राह कुछ आसान हुयी। जब मैने मधुमेह की रपट लिखने का मन बनाया तो तालिका बनाना सिरदर्द लगा। तालिका को देखकर कम्प्यूटर वालो ने 20 रुपये प्रति तालिका की बात कही। अधिक काम होने पर 15 रुपये के लिये वे तैयार हो गये। पर मेरे लिये तो इतना खर्च उठाना सम्भव नही था। अत: मैने ही इसके लिये मेहनत करने की ठानी। आज इस रपट मे 62,000 तालिकाए जोडी जा चुकी है और हजारो पन्ने लिखे जा चुके है। बाजार से इतना काम करवाने पर दस लाख रुपये लग जाते। ये तो बात हुयी तालिका बनाने की। अब इसे इकोपोर्ट मे अपलोड भी करना था। एक दिन मे छह घंटे लगातार काम करने पर 200-250 तालिकाए अपलोड हो पाती थी। आठ महिनो के अथक प्रयास से मैने 52,000 तालिकाए डाली। सारा काम छोडना पडा। स्वास्थ्य की बलि चढ गयी। एक काम करते-करते मन चिडचिडा हो गया। पर अब तो जैसे आदत हो गयी है।

अभी तक शामिल की गयी 62,000 से अधिक तालिकाए ऊँट के मुँह मे जीरे के समान है। कुल तालिकाए दो लाख से अधिक है। इस काम के कारण मेरा हिन्दी लेखन प्रभावित हो रहा था। इसलिये मैने इस वर्ष के आरम्भ से यह फैसला किया कि अब हिन्दी भी लिखूंगा। जंगल भी जाऊँगा और तस्वीरे भी लूंगा ताकि थकान से उबर पाऊँ।

हिन्दी लेखो की भी यही कहानी है। कुछ वर्ष पहले इतने सारे लेख लिखे कि देश की बारह कृषि पत्र-पत्रिकाओ के पास अगले दस वर्ष तक के लिये लेख जमा हो गये। अब वे विनम्रतापूर्वक आलेख न भेजने की बात लिखते है। इकोपोर्ट पर 30,000 से अधिक तस्वीरे है। उनके पास 50,000 से अधिक तस्वीरे कतार मे है। इसी तरह 20,000 तस्वीरे डिस्कवरलाइफ़ मे कतार मे है। जंगल जाना मतलब नयी तस्वीरो का आना। यह अंतहीन प्रक्रिया है।

मुझे अपने अब तक के अनुभव से यह अहसास हुआ है कि समय बहुत मूल्यवान है और इसके सही उपयोग से हम समाज के लिये बहुत कुछ कर सकते है। किसी भी काम को कल पर टालना ठीक नही। और सबसे महत्वपूर्ण बात यह लगी कि मनुष्य मे असीम क्षमता है। मन थक सकता है, तन थक सकता है पर यदि फिर भी लगातार काम करते रहे तो असम्भव लक्ष्य भी पाये जा सकते है। छत्तीसगढ के प्रसिद्ध कवि श्री हरि ठाकुर की यह पक्तियाँ सदा नया जोश भरती रहती है।

‘यदि पैरो मे गति हो तो क्या कर लेंगी राहे’

(लेखक कृषि वैज्ञानिक है और वनौषधीयो से सम्बन्धित पारम्परिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण मे जुटे हुये है।)

© सर्वाधिकार सुरक्षित

Comments

Gyan Dutt Pandey
27 Mar 2008, 09:59
बहुत अच्छा लगा यह पढ़ना। और अपने में भी कुछ जोश आया।
चरैवेती चरैवेती! बस चलते रहें!
नीरज रोहिल्ला
27 Mar 2008, 11:11
पंकजजी,
क्या आप अपने आलेखों को लिखने के लिये Microsoft Word का प्रयोग करते हैं ? यदि आपका लेखन शोधपत्र के प्रकार अथवा एक थीसिस के प्रकार का है तो Latex नामक साफ़्टवेयर आपके काफ़ी काम का हो सकता है । इसे आप विण्डोज पर भी स्थापित कर सकते हैं । टिप्पणी लम्बी जो जायेगी लेकिन मैं आपको इसकी कुछ खासियत बताता हूँ ।

१) मान लीजिये आप अपने लेख में कुछ सन्दर्भ(References), चित्र, तालिकायें डालते हैं तो Latex स्वत: ही Contents में List of Figures, List of Tables etc. डाल देगा ।

२) Referencing is extremely useful and easy in Latex. All you need to do is to define a "keyword" for a particular reference. Whenever you want to refer to a particular article, \cite{keyword} will automatically insert the reference in your article.

यदि आपको लगता है कि ये आपके काम का हो सकता है तो मैं इस पर एक विस्तृत लेख लिखकर अधिक जानकारी दे सकता हूँ । उन्मुक्तजी भी Latex के बारे में पक्का जानते होंगे ।
राज भाटिया
27 Mar 2008, 14:07
पकंज जी दिल मे हिम्मत हो इरादे मजबुत हो, ओर यदि पैरो मे गति हो तो क्या कर लेंगी राहे’फ़िर तो कोई भी राह मुश्किल नही, आप ने तो बहुत ही ज्यादा मेहनत की हे,एक दिन रगं लाये गी आप की मेहनत, बहुत अच्छा लगा आप ला लेख पढ कर , यहा आप की कोई मदद कर सके तो बताना, मे हाजिर हू.
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