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यूँ तो हथियार न डालिये मच्छरो के आगे
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यूँ तो हथियार न डालिये मच्छरो के आगे

हिन्दी वेबसाइट में पंकज अवधिया के लेख
पंकज अवधिया

रोज शाम को जब आपके घरो मे मच्छरो का आक्रमण होता है तो आप क्या करते है? कई प्रकार के काइल्स जलाते है या फिर तरल अपनाते है, मच्छरदानी के अन्दर घुस जाते है या फिर अपने और बच्चो के शरीर मे क्रीम लगाकर तेज पंखा चलाकर सो जाते है। यदि ठंड लगे तो चादर ओढ लेते है। कुल मिलाकर पूरे देश मे ये ही तरीके अपनाये जाते है मच्छरो से बचने के लिये। पर क्या इससे आपकी समस्या का समाधान हो जाता है। नही ना। क्योकि साल के कुछ महिनो मे मच्छर इतने अधिक बढ जाते है कि ये उपाय भी धरे के धरे रह जाते है। ऐसे मे हम जी भर के प्रशासन को कोसते है और एक की जगह कई काइल्स जलाने लगते है। आप तो जानते ही है कि प्रति वर्ष मच्छरो से होने वाली बीमारियाँ बढती ही जा रही है। मच्छरो से होने वाली बीमारियो को तो हम जानते है पर इसके कारण अप्रत्यक्ष रूप से जो बीमारियाँ होती है उससे हम जानकर भी अनजान बने हुये है।

सभी काइल्स और तरल मे एलीथ्रीन नामक कीटनाशक होता है जिसके दुष्प्रभाव को दुनिया भर मे लोग जानते है। घरो मे आम तौर पर हमेशा ही इन साधनो का उपयोग किया जाता है। पता नही कितनी अधिक मात्रा मे यह रसायन आपकी श्वाँस नली के माध्यम से आपके शरीर मे जा रहा है? आप अपनी छोडिये बच्चो की सोचिये। नाना प्रकार की बडो की बीमारियाँ अब बच्चो को हो रही है। हाल ही मे एक पालक ने मुझे बताया कि उनके बच्चे को अस्थमा है। कई तरह की जाँच करवायी, मौसम बदलने की गरज से सिंगापुर घूम आये, यहाँ तक कि घर भी बदल दिया पर राहत नही मिली। मैने पूछा कि आप मच्छर भगाने वाले तरल का उपयोग करते है? तो वे चहक के बोले हाँ बिल्कुल और हमने तो सभी कमरे मे दो-दो लगा रखे है। मैने उनसे कहा कि इन सब को हटा दे और देखे। हो सकता है बीमारी की जड यही हो। वे मान गये और कुछ दिनो बाद उन्होने बताया कि असली जड तरल नही काइल्स थी और अब इनके हटने से न केवल बच्चा ठीक हो रहा है बल्कि उनका खुद का सिरदर्द चला गया। ऐसे सैकडो उदाहरण मिलेंगे आपको। यकीन न हो तो आप अपने ऊपर आजमा कर देख ले। आपने पैसे देकर यह आत्माघाती कदम उठाया है। अभी तक तो प्रशासन ही आपकी मौत का प्रबन्ध करता रहा पर अब आपने खुद अपने पैरो पर कुल्हाडी मार ली है।

छत्तीसग़ढ की ही बात करे। यहाँ रोज शाम को एक गाडी घूमती है और उससे धुआँ फैलाया जाता है मच्छरो का दम घोटने के लिए। इस धुए मे मेलाथियान जैसे कीटनाशक होते है। पूरी दुनिया मे इन कीटनाशको पर प्रतिबन्ध है पर हमारे देश मे खुलेआम इसका उपयोग हो रहा है। आधुनिक शोधो से पता चला है कि ये कीटनाशक कैसर पैदा कर सकते है। लीजिये एक गाडी से तो मच्छरो का बाल भी बाँका होने से रहा उल्टे आपको सडको मे खुले आम यह जानलेवा बीमारी बाँटी जा रही है। यह धुँआ हवा के साथ घर के अन्दर भी पहुँच जाता है और आम लोगो का दम घुटने लग जाता है। वैसे मेरे पास एक खुशखबरी भी है। मुझे एक ठेकेदार ने बताया कि सबको हिस्सा देने के बाद इतना पैसा बचता ही कहाँ है जो कीटनाशक का प्रयोग किया जा सके। इसीलिये हम तो केवल कैरोसिन का प्रयोग करते है।

यह मान लिया कि इस लेख को पढने के बाद कुछ समय के लिये आप इन जानलेवा उपायो का प्रयोग बन्द कर देंगे पर जब मच्छर काटेंगे तो झुंझलाकर फिर वही सब शुरु हो जायेगा। मुझे एक बात बताइये। आप इतने सारे उपाय मच्छरो को भगाने के लिये करते है पर क्या कभी यह जानने की कोशिश करते है कि आखिर ये आ कहाँ से रहे है? आस-पास की गन्दगी ही से ना। और यह आस-पास आपका ही आस-पास है। तो फिर क्यो न इस गन्दगी से छुटकारा पाया जाये। आप अब तक तो प्रशासन को दोष देते आये है पर वह तो आने से रहा। रोज पता नही कितने मच्छर आपको और आपके परिवार के सदस्यो को काट रहे है। एक बार काटने ही से बीमारियाँ हो सकती है पर यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर है कि कब तक आप बचे रहते है। एक बार यह कम हुयी नही कि डाक्टरो के महंगे चक्कर शुरु।

यह कदम बडा ही झिझक भरा है पर कोशिश तो करिये जानने की कि क्या आपके पडोसी भी यही समस्या झेल रहे है और अपने आप को असहाय पा रहे है? आपको पता चलेगा कि वे भी परेशान है तो फिर रविवार का समय निश्चित करिये और सब मिलकर मच्छरो के अड्डो को नेस्तनाबूत कर दीजिये। आस-पास के लोगो से मिलने आप तरोताजा हो जायेंगे। सबसे बडी बात यह होगी कि आपके बच्चे यह सब देखकर एक नया पाठ सीखेंगे जो स्कूली किताबो मे नही मिलेंगा आगे आने वाला समय और कठिन होने वाला है। हम बढते ही जायेंगे और गन्दगी फैलाते ही जायेंगे। ऐसे प्रयास बच्चो को बिना झिझक आगे आने के लिये प्रेरित करेगा। इस सब के लिये कुछ पैसे लगेंगे। यदि आप बीमारियो पर होने वाले खर्च से इसकी तुलना करेंगे तो आप अपने को लाभ मे ही पायेंगे। रविवार को मच्छर भगाओ दिवस मनाइये। आपके प्रयास और लोगो को प्रेरणा देंगे और साथ ही प्रशासन को शर्मसार करेंगे। वे गल्ती से रविवार को आ जाये तो उन्हे भी बाहर का रास्ता दिखा दे यह कहकर कि आज मच्छर भगाओ दिवस है। वे जरुर इस व्यंग्य को समझेंगे। नीम तो एक वनस्पति है पर इसके अलावा सैकडो वनस्पतियाँ है जो आपको मच्छरो से निजात दिलवा सकती है। इनमे से ज्यादातर वनस्पतियाँ आपके आस-पास खरपतवार की तरह उग रही है। आपको केवल एकत्र करके सुखाना है और फिर जलाना है। इसका धुआँ नुकसान नही करता। बहुत सी वनस्पतियो का धुआँ तो शरीर को निरोग बनाता है। आज के बाजारी युग ने अच्छी चीजे आपको बाजार मे नही बल्कि आस-पास मिलेंगी। अब तो होली भी आ रही है। आप विशेषज्ञो से इन वनस्पतियो की पहचान करवा कर हरे-भरे वृक्षो की जगह इन्हे जलाने की जानकारी बाँट सकते है। इससे आपका पडोस ही नही बल्कि पूरा शहर मच्छरो से मुक्त हो पायेगा। तो फिर देर किस बात की?

(लेखक कृषि वैज्ञानिक है और वनौषधीयो से सम्बन्धित पारम्परिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण मे जुटे हुये है।)

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